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01 May 2021

सच तो सामने आएगा ही

सच 
सिर्फ वही नहीं होता 
जिसे हम देखते हैं 
या 
जो हमें दिखाया जाता है 
सच 
कभी-कभी छिपा होता है 
घने अंधेरे की 
कई तहों के भीतर 
जिसे कुरेदना 
आसान नहीं होता
और फिर भी 
शंकावान होकर 
गर कोई दिखाना चाहे भी 
तो उसे कर दिया जाता है किनारे 
पागल-सनकी और न जाने 
क्या-क्या कहकर 
इसके बाद भी 
कई युगों के बाद 
सच से 
साक्षात्कार का समय आने तक 
हम देख चुके होते हैं 
विध्वंस के कई दौर 
इसलिए 
बेहतर सिर्फ यही है 
कि हम सुनें 
उन चेतना भरी आवाजों को
जिन्हें दबा दिया जाता है 
हर तरफ उठ रही 
आग की लपटों 
और 
बेहिसाब शोर में। 

-यशवन्त माथुर©
01052021

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