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05 February 2011

आँचल तले धूप

वो उसको मिली
एक नन्ही कली
सड़क किनारे
कलपती हुई सी
विधाता ने दे दिया था
उसको जीवन

पर हाय! जननी का मन
द्वन्द हुआ होगा
हलचल मची होगी
कुछ पल शायद
वो भी रोयी होगी
मजबूरी थी कि
हया थी
कुछ कुदरत की भी
दया थी

पास से गुज़र रही थी
'वो'
'वो' उसकी असली जननी
जिसने मर्म समझा
उसके जीवन का

वो छुटकी चुहिया
देख रही थी
उसे टुकुर टुकुर
हाथ पैर पटक रही थी
मचल रही थी
उसकी बाहों में
समा जाने को
प्यार पाने को

और अगले ही पल
जैसे खींचता है चुम्बक
लोहे को
अनजान ममता ने
खींच  लिया उसे 
और दिखा दी
धूप
अपने आँचल की
छाँव तले.
 

03 February 2011

तुम्हारी खोज में

सुन रहा हूँ
कहीं दूर से तुम्हारी आवाज़
गगन में गूंजती परिंदों की
सरगम में तुम्हारे सुरों का मिलना
बस एक एहसास कि
शायद यहीं कहीं हो
मेरे समीप किन्तु अदृश्य
ठंडी हवा के झोंके सा
मुझको छू कर निकल जाना
चौंकाना और चहकना
एक अजीब सा रहस्य
तुम्हारी इस निकटता में
इस सन्नाटे में
मेरे क़दमों में तुम्हारा
हमकदम होना
तुम यहीं किन्तु कहाँ
अनंत की ओर अपलक
बेसुध सा निहार रहा हूँ
चलता जा रहा हूँ
राह में मिलते शूलों को
गले लगा कर
तुम्हारी खोज में!

02 February 2011

बहुत बहुत धन्यवाद रवीश कुमार जी को

आज के दैनिक 'हिन्दुस्तान' में पापा के ब्लॉग को 'ब्लॉग वार्ता' में शामिल करने के लिए रवीश कुमार जी को बहुत बहुत धन्यवाद.





 संस्मरणों का ये सिलसिला अभी जारी है.

01 February 2011

'भारत' बनाम 'इण्डिया'



बहुत दिनों से ये बात मन में थी;मन में क्या थी सच कहूँ तो पापा से इस पर डिस्कशन कई बार किया है और उन्होंने सहमति ही जतायी है मेरी बात से.

अक्सर ये बात मन में कौंधती है कि अमरीका को अमरीका ही कहा जाता है,इंग्लॅण्ड को इंग्लॅण्ड,ब्रिटेन असल में भी ब्रिटेन ही है और फ्रांस,फ्रांस ही कहलाता है.नजदीक की बात करें तो पाकिस्तान को पाकिस्तान,नेपाल को नेपाल,भूटान को भूटान और चाइना को चाइना के नाम से सारी दुनिया जानती है.दुनिया का हर देश अपने मूल नाम से ही जाना जाता है; पर भारत या हिन्दुस्तान को इंडिया कहा जाता है.क्यों?

हमारे देश की आत्मा भारत में बसती है.ओबामा भारत आकर नमस्ते बोल सकते हैं,होली को स्पष्ट रूप से होली कह सकते हैं तो भारत शब्द को बोलने में उन्हें या किसी भी राष्ट्राध्यक्ष को कोई दिक्कत नहीं होगी यह भी तय है.

बहुत से लोग ज्योतिष या अंक शास्त्र को नहीं मानते लेकिन इसकी कसौटी पर भी भारत इण्डिया से कहीं बेहतर है.

बात बात पर हल्ला मचाने वाले,हड़ताल और आन्दोलन करने वाले,पृथक नए  राज्यों की वकालत करने वाले क्या कुछ करेंगे?

हमें गर्व है अपने गौरवशाली इतिहास पर,अनमोल विरासतों पर और प्राणोत्सर्ग करने वाले वीर महापुरुषों पर तो अपने देश के मूल नाम पर गर्व क्यों नहीं कर सकते?
क्या वैश्विक स्तर पर रुपये के चिह्न के बाद भारत शब्द को प्रचलन में लाया जा सकता है? और क्या हम इण्डिया को त्याग सकते हैं?

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