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28 February 2011

ये डायरी के पन्ने

[चित्र साभार:गूगल सर्च ]
कुछ बातें 
जो अक्सर घुमड़ती हैं 
मन में 
कुछ अच्छी 
कुछ बुरी
कुछ खुशी 
कुछ गम 
कह देता हूँ 
बिना कुछ 
सोचे समझे 
बेलाग बेधड़क 
संकोच रहित हो कर 
जिल्द बंधे 
डायरी के 
इन पन्नों से

ये पन्ने 
महसूस करते हैं 
मेरे मन को 
मन के द्वन्द को
स्वार्थ  रहित 
होकर 
ये सुनते हैं 
शान्ति से 
मुझ को 
और 
बाद में 
एहसास 
भी करा देते हैं 
सही- गलत का

ये डायरी 
ये पन्ने 
सच्चे हमसफ़र हैं 
सच्चे दोस्त हैं 
राजदार  हैं
सच्चा प्यार हैं 
मेरी जिंदगी का.

25 February 2011

सूरज से मैंने कहा....

सूरज से मैंने कहा 
कल थोड़ी देर से आना 
कुछ देर ठहर कर मुझ से 
आज थोड़ी और बात कर लो 

चाँद भी कुछ देर कर लेगा 
विश्राम तुम्हारे जाने तक
कुछ देर रह लेगा वो भी 
कल तुम्हारे आने तक 

बोला सूरज मुझ से कि 
मैं इंसान नहीं हूँ 
घडी की सुइयों में जो हेर फेर करके 
कभी सोता है और कभी जागता है 

है निश्चित मेरी गति 
समय आने और जाने का 
है नहीं कोई अवसर 
कुछ  कहने और बहाने का

है नहीं विश्राम मुझ को 
निरंतर चलता रहता हूँ 
कहीं उगता हूँ 
कहीं डूबकर चल देता हूँ

आते  हैं बादल,कोहरे 
और अँधेरे मेरी राह में
स्थिर रहकर तुम को 
 मैं रौशनी देता रहता हूँ  

जाने दो ऐ दोस्त!कि 
अब वक़्त हो चला है 
किसी छोर पर भोर 
कर रही होगी इन्तजार  मेरा.

23 February 2011

उसकी खता क्या थी?

आना चाहती थी वो 
तुम्हारे जीवन में 
तुम्हारा अक्स बनके
बिखेरने को खुशियाँ

कि उसकी हर अदा पे 
मुस्कुराहटें तुमको भी मिलती 
जीती वो भी कुछ पल 
सौगातें उसको भी मिलतीं 

आना पायी वो 
देख न पायी  इस जहान को
क्यों छीन लिया तुमने 
आने वाली उस सांस को 

हो तुम कुसूरवार 
सब कहेंगे मगर 
अरे ये तो बात दो 
उसकी खता क्या थी?

(न तो मैं इसे शायरी कह सकता हूँ न कविता और न ही मैं उर्दू भाषा जानता हूँ बस इन पंक्तियों के माध्यम से स्त्री भ्रूण हत्या को रोकने का एक आह्वान करने का प्रयास मात्र किया है)

20 February 2011

मै,तुम और हम

जो मैं हूँ
वो तुम नहीं हो सकते
जो तुम हो
वो हम नहीं हो सकते
फिर भी पड़ते है सभी
मैं तुम और हम की लड़ाई में
आखिर क्या रखा है
इस दुश्मनी की खाई में?

आओ थाम लें हाथ
और बढ़ चलें एक राह पर
जिस राह पर साहिल
  देख कर मुस्कुरा रहा है .

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