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09 April 2011

पी जी का स्टूडेंट

(Photo curtsy-Google)
स्कूल  जाने वाले 
एक छोटे बच्चे से मैंने पूछा  -
कौन सी क्लास में पढते हो ?
वो बोला पी जी में 
जवाब सुनकर 
मेरा तो सर चकराया 
पर तभी 
उसकी मम्मी ने फरमाया 
भैय्या !
ये प्ले ग्रुप में पढता है!

05 April 2011

आज कुछ ड्राइंग्स

आज इस ब्लॉग पर देखिये पारुल की कुछ ड्राइंग्स.कक्षा -7 की छात्रा पारुल मेरी भतीजी हैं और लखनऊ में ही रहती हैं.ड्राइंग-पेंटिंग और गाना गाने में इनकी विशेष रुचि है और क्रिकेट इनका मन पसंद खेल.बड़े होकर डाक्टर बनना चाहती हैं.दुआ कीजिए इनका सपना सच हो और फिलहाल देखिये इनकी बनायी कुछ ड्राइंग्स को -

(यह धरती बहुत सुन्दर है )

(अभी तक तो बस नहीं आई,चलो बहन कुछ इंतज़ार करते हैं )

(Modeling)

(Poem)

(अगर ये पेड़ न रहे तो हम झूला कैसे झूलेंगे ,पेड़ न काटें )

(चूं चूं करती आती  चिड़िया ,बैठ शाख पे गाती चिड़िया )

(चूं चूं करती आती  चिड़िया ,बैठ शाख पे गाती चिड़िया )

(चूं चूं करती आती  चिड़िया ,बैठ शाख पे गाती चिड़िया )

अगर  आपको ये ड्राइंग्स अच्छी लगीं तो बताईयेगा ज़रूर और पारुल को अपना आशीर्वाद भी दीजियेगा!

03 April 2011

ये तो होना ही था

प्यार उसने भी किया था
महसूस उसने भी किया था
सपने उसने भी बुने थे
दिन महकने लगे थे
पर अचानक
एक जोर का झटका
हिला गया उसको
और उसने देखा
शीशे के दिल के
अनगिनत टुकड़े
ज़मीन पर बिखरे पड़े थे
और सहारा देने को
आंसू अपनी बाहें फैलाये
कह रहे थे -
ये तो होना ही था.

01 April 2011

मूर्ख ही तो हैं

फुटपाथों पर जो रहगुज़र किया करते हैं 
सड़कों पर जो घिसट घिसट कर चला करते हैं 
हाथ फैलाकर जो मांगते हैं दो कौर जिंदगी के 
सूखी छातियों से चिपट कर जो दूध पीया करते हैं 
ईंट ईंट जोड़कर जो बनाते हैं महलों को 
पत्थर घिस घिस कर खुद को घिसा करते हैं 
तन ढकने को जिनको चीथड़े भी नसीब नहीं 
कूड़े के ढेरों में जो खुद को ढूँढा करते हैं 
वो क्या जानें क्या दीन क्या ईमान होता है 
उनकी नज़रों में तो भगवान भी बेईमान होता है 
ये जलवे हैं जिंदगी के ,जलजले कहीं तो हैं 
जो इनमे भी जीते हैं, मूर्ख ही तो हैं.

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