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04 November 2015

चलताऊ शब्द .....

इन चलताऊ
शब्दों को
कोई कविता समझता है
कोई कहानी
कोई बस यूं ही
एक नज़र डालता है
और चल देता है
अपनी राह
लेकिन मैं
इन बेकार से
बिना मतलब के
फटीचर से शब्दों से
संतुष्ट करता हूँ खुद को
हमेशा से।

~यशवन्त यश©

03 November 2015

समझ नहीं आता है

कभी कभी
मन कहता कुछ
करता कुछ है
सोचता कुछ
लिखता कुछ है
कुछ कुछ करता हुआ
मन के साथ
समय बीत जाता है
और इस बीच क्या होता है
समझ नहीं आता है।

~यशवन्त यश©

02 November 2015

कुछ लोग-29

कुछ लोग
धन दौलत से
अमीर लोग
सिर्फ देखते हैं
अपना 'स्टेटस'
हर जगह
हर कहीं
सिर्फ वहीं
घुलते-मिलते
आते हैं नज़र
जहां वह
और उनके अपने
चमकीले पर्दों के भीतर
उड़ाते हैं
कागज की चिन्दियाँ। 

~यशवन्त यश©

01 November 2015

बदलती तारीखें.......

बदलती तारीखें
पल पल नये रंगों में
रंगती तारीखें
अपने भीतर
कुछ समेट लेती हैं
कुछ निकाल देती हैं
मन से
कभी बेमन से
थक कर कहीं
रुकती नहीं
बरस दर बरस
कहीं दबती, छुपतीं
आगे बढ़ती तारीखें
इंसानी मन की तरह
रंग बदलती तारीखें। 

~यशवन्त यश©

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