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06 December 2018

कैसे खुशी की बात करूँ?

दिन-रात अंधेरे ही अंधेरे
कब उजाले से मुलाक़ात करूँ
कैसे खुशी की बात करूँ?

कहीं उम्मीद की आस नहीं
खुद को ही सिर्फ निराश करूँ
कैसे खुशी की बात करूँ?

कई अजूबों की इस बस्ती में
क्यूँ झूठी मस्ती को आबाद करूँ
कैसे खुशी की बात करूँ?

खून से रंगे हुए इन चौराहों पर 
मन के मत-भेद सरे-आम करूँ
कैसे खुशी की बात करूँ?

दिन-रात अंधेरे ही अंधेरे
जाती साँसों पर विश्वास करूँ
कैसे खुशी की बात करूँ?

-यश©
06/12/2018

05 December 2018

आखिर क्यूँ ?

चित्र सौजन्य-The Eyes of Children around the World
आखिर क्यूँ ये दहशत, क्यूँ आँखों में सूनापन है ?
क्यूँ डरा सा, सहमा सा ,क्यूँ काँटों सा बचपन है ?

यौवन की देहरी आने में, समय बहुत सा बाकी है । 
झूलों में, मैदानों में, खेलने की उमर  भी बाकी है ।  

फिर क्यूँ गुम हुआ चहकना,गया कहाँ वह सच्चापन है ?
मन की अपने जो था करता ,कहाँ गया वह बच्चापन  है?

–यश ©
05/12/2018

03 December 2018

बस ऐसे ही चलना है

चित्र सौजन्य- The Eyes of Children around the World
है ये किस्मत मेरी कि मुझे इसी जंजाल में रहना है।
बोझों से घिरे रह कर, न पढ़ना है न लिखना है।
दो जून की रोटी माँ बनाकर तभी खिलाएगी
जब शाम को चंद सिक्के उसके हाथों में रखना है।
ये न पूछना मुझसे कि, बनूँगा क्या बड़ा हो कर 
मज़दूर हूँ मेरा काम तो औरों की तकदीर बदलना है।
है ये किस्मत मेरी कि मुझे इसी हाल में रहना है
क्या होगा कुछ कहने से बस ऐसे ही चलना है।
-यश©
02/12/2018

01 December 2018

मेरी आवाज सुनो!

चलते चलो इन राहों पर
मत कदमों की ताल सुनो
पंख पसार कर अब ऊंची
एक नयी परवाज़ चुनो। 

मेरी आवाज सुनो!

यह समय काया पलटने का है 
इसमें मुखौटों का काम नहीं 
यह समय कुछ कर गुजरने का है 
इसमें रुकने का नाम नहीं । 

निडर हो कर नव जागरण का 
नित नया एक गान सुनो 
युवा धरा की युवा शक्ति तुम!
खुद में स्वाभिमान बुनो। 

मेरी आवाज़ सुनो!

-
-यश ©
01/दिसंबर/2018 

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