प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

यदि आप चाहें तो हमें कुछ सहयोग कर सकते हैं

06 February 2020

सैनिक

हम सोचते हैं
सैनिक
सिर्फ सैनिक होता है
जिसका काम
सिर्फ मारना और मरना होता है
अपने देश पर
मिटना होता है
लेकिन
हम नहीं सोचते
कि सैनिक भी
इंसान होता है
हमारी-तुम्हारी तरह
उसके भीतर भी
प्राण होता है
उसका भी
अपना एक परिवार होता है
जो निर्भर करता है
उसकी सकुशलता पर
उसकी वीरता पर
उसके कर्तव्य
और धीरता पर।
सैनिक!
सबका विश्वास, आश्वासन
और गर्व होता है
क्योंकि वह
सिर्फ सैनिक नहीं
एक संकल्प होता है।

-यशवन्त माथुर ©
08/01/2020

04 February 2020

यायावर हैं हम...

मौन समय की राहों में
हैं थोड़ी खुशियाँ, थोड़े गम
यायावर हैं हम।

इन राहों में थोड़ी मस्ती है
इन  राहों में अपनी हस्ती है।
एक शांत सरल सी रेखा पर
इंसानों की अपनी बस्ती है।

है पूर्व यही-पश्चिम यही
उत्तर-दक्षिण का न कोई भ्रम
यायावर हैं हम।

हमने बस चलना सीखा है
वर्तमान में ढलना सीखा है।
और भविष्य के खातों में
स्वप्नों को लिखना सीखा है।

ऊबड़-खाबड़ इसी आज में
चुभते काँटे थोड़े कम
यायावर हैं हम।

-यशवन्त माथुर ©
04/02/2020

02 February 2020

सैनिक

न हिन्दू होता है
न मुसलमान होता है
सैनिक तो सिर्फ
एक इंसान होता है।

इंसान , जिसकी रगों में
स्वाभिमान बसता है
गोलियां खाता है
फिर भी वो हंसता है।

उसका करम ही
उसकी पहचान होता है
शक्ल कोई भी हो
नाम हिंदुस्तान होता है।

सीना तान, सीमा पर
उसकी चहलकदमियों से
पिघल जाती है बर्फ भी
बूटों की गर्मियों से।

सारे जहां से अच्छा
एक वीर जवान होता है
सैनिक तो सिर्फ
एक इंसान होता है। 

-यशवन्त माथुर ©

14 January 2020

ज़िंदगी लगती है जंजीर की तरह.....

बेतरतीब खिंची लकीर की तरह
ज़िंदगी लगती है जंजीर की तरह ।
वक़्त की पैनी धार पर रगड़ते हुए
डरता है दिल भी अब धड़कते हुए ।
है आलम यह कि फासले ये कहने लगे
जो अब तक थे आदम अब बदलने लगे।
मिलता नहीं अब कोई फकीर की तरह
दीवारों पर सब लटके हैं तस्वीर की तरह।

-यशवन्त माथुर ©
14/01/2020 

Popular Posts

+Get Now!