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04 April 2020

क्योंकि वो हम जैसे नहीं.....

हमें नहीं परवाह 
उन साथियों की 
उन अपनों की 
जिनके सपने 
भूख-लाचारी और 
बेकारी से 
हो रहे हैं चूर-चूर, 
क्योंकि 
यह उनकी समस्या है 
या 
उनकी किस्मत है 
कि उनके हालात 
हमारे जैसे 
विलासितापूर्ण नहीं 
कि वो हम जैसे 'खास' नहीं ,
वो सिर्फ 'आम' हैं 
जो बने हैं 
सिर्फ हमारी चाकरी के लिए 
इंसान के रूप में 
उनका सिर्फ 'इंसान' 
होना ही काफी नहीं 
क्योंकि वो जो हैं , वो हैं 
लेकिन हम जैसे नहीं। 

-यशवन्त माथुर ©
04/04/2020

03 April 2020

सिर्फ तमाशाई हैं हम

कहीं हो खुशी
या कहीं हो गम
सिर्फ तमाशाई हैं हम ।

हमने खड़े किये हैं
मुसीबतों के शहर
जहां पल-पल तोड़ता है
ये समय अपना दम।

सिर्फ तमाशाई हैं हम।

-यशवन्त माथुर ©
03/04/2020

02 April 2020

सब यूं ही चलता रहेगा......

सब यूं ही चलता रहेगा
समय के साथ
सब यूं ही बदलता रहेगा।
बदलाव की यह सोच
यह महत्त्वाकांक्षा
सिर्फ हमारा भ्रम है
क्योंकि हम
जा चुके हैं
अपने समय से
कई सदियों पीछे। 
हमारा मन
हमारी सोच
हमारा स्तर
सिकुड़ चुका है
और इसीलिए
हमारी आँखों को
सिर्फ वही दिखता है
जो हम देखना चाहते हैं
सत्य के चेहरे पर लगे
कई परतों वाले
द्विआयामी चश्मे से।

-यशवन्त माथुर©
02/04/2020 

01 April 2020

वक्त के कतलखाने में -18

एक अजीब सी बेबसी
जब दिखती है
कुछ लोगों के चेहरों पर
तो ऐसा लगता है
जैसे
सब कुछ होकर भी
कुछ नहीं होने का एहसास
भीतर से खोखला करता हुआ
काँटों भरे रास्तों पर चलता हुआ
अपने तीखेपन से
याद दिलाता है
जीवन के प्रेक्षागृह में
लगा हुआ
वही पुराना चलचित्र
जिसके घिसे हुए दृश्य
ले जाते हैं अपने साथ
धूल भरे उन्हीं गलियारों में
जो कभी
हुआ करते थे आबाद
वक्त के कतलखाने में।

-यशवन्त माथुर ©
01/04/2020

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