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03 June 2020

शानदार सवारी ....(विश्व साइकिल दिवस पर)


स्कूटी, स्कूटर और
मोटर साइकिलों के इस युग में
मेरे जैसे
'मजदूर क्लास' कुछ लोग
अपने साथ
रोज ले कर चलते हैं
'पुरातन', 'आदिम'
और कुछ
न कहे जा सकने वाले
विशेषण।
क्योंकि सब कुछ होते हुए भी
दो पहिया के नाम पर
हमारे पास
है
तो सिर्फ एक साइकिल
जिस पर चलते हुए
और जिसे चलाते हुए
मीलों लंबा रास्ता
दम घोंटू धुआँ फैलाए बिना ही
धीरे धीरे कट जाता है
सफर पूरा हो जाता है।
अपने बदलते रंग रूप
और आधुनिकता के साथ
साइकिल
अब भी
एक शुद्ध विचार है
आम जीवन का आधार है
जिसके पहियों पर
टिका हुआ है बोझ
अर्थव्यवस्था
और हमारी
सकल प्रगति का।

-यशवन्त माथुर ©
03/06/2020  

02 June 2020

10 वर्ष पूरे

कभी कम, कभी ज्यादा लिखते हुए ब्लॉगिंग में आज 10 वर्ष पूरे हो गए। मैं अच्छे से जानता हूँ कि मेरा लिखा हुआ उस स्तर का नहीं है जितना मेरे हमउम्र  साथियों का है, फिर भी जो मन में आता है उसे बिना कुछ ज्यादा सोचे कि किसी को पसंद आएगा या नहीं; सीधे पोस्ट कर देता हूँ। ' जो मेरा मन कहे' नाम रखने का यही कारण भी है। यह एक तरह से मेरी डायरी जैसा है जिसमें कुछ भी व्यक्तिगत नहीं है। जो भी है , जैसा भी है मेरा ब्लॉग है। जब तक गूगल मुफ़्त का यह प्लेटफ़ॉर्म बनाए रखेगा, मेरा ब्लॉग भी बना रहेगा और अधिक कुछ सोचा नहीं है।

-यशवन्त माथुर 
02/06/2020  

01 June 2020

उस दौर में हैं हम ....

उस दौर में हैं हम
जहाँ व्यथित है 
हर कामगार
जहाँ अनिश्चित है 
जीवन और रोजगार 
थमा हुआ है व्यपार। 
सिर्फ हाहाकार ही है 
हर जगह 
जो सुनाई देता है 
सिर्फ चंद ही लोगों को 
नक्कारखाने में 
तूती की तरह। 
भविष्य और अपनी 
परिणति से अनजान 
यह दौर 
एक शुरूआत है 
अंतहीन पन्नों पर लिखे गए 
काले अध्याय की 
जिसका एक एक अक्षर 
एक एक मात्रा 
और वाक्य विन्यास 
इस कदर बिगड़ा हुआ है 
कि उसे फिर से रचने में 
लग जाएंगी 
इतनी सदियाँ 
कि तब तक शायद 
आकार ले ले 
एक नई सभ्यता। 

-यशवन्त माथुर ©
01/06/2020

खुद ही चलना है ....

हम चलें न चलें
हम बदलें न बदलें
समय को ऐसे ही चलना है
समय को ऐसे ही बदलना है ....
कभी कभी लगता है
सब एक रस है
जो हो रहा है
वो नीरस है
बस
एक अंत:प्रेरणा ही
गति दे सकती है
उबार सकती है
इस बोझिलता से
जिसे खुद ही बदलना है
जिसे  खुद ही चलना है।

-यशवन्त माथुर ©
01/06/2020

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