01 January 2026

नव वर्ष

नयी उम्मीदों के साथ 
नयी बातों के साथ 
नए ख्यालों के साथ 
ख्वाब सबके पूरे हों ।
 
जो बरसों से अधूरे रहे 
अनकहे-अनसुने रहे
चाहे जितने प्रकार हों 
शब्द सब  साकार हों। 

नया सूरज कुछ कहता रहे 
हर दिन कुछ बनता रहे  
रात का अंधेरा छँटता रहे 
प्रेम भाव बँटता रहे। 

नववर्ष!
आशा का प्रतीक हो
उल्लास से व्यतीत हो 
तिनका-तिनका खुशियों से 
घर-आँगन रोशन हो। 

~यशवन्त माथुर©

2 comments:

  1. शुभकामनाएं नववर्ष पर |

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  2. यह कविता पढ़कर मन अपने आप हल्का हो जाता है। आप नए साल की उम्मीद को बहुत सहज और सच्चे शब्दों में रखते हैं। मुझे अच्छा लगा कि आप बड़े वादों की जगह छोटे-छोटे सुखों की बात करते हैं। नए सूरज, अंधेरे के छँटने और प्रेम के बँटने की पंक्तियाँ दिल से जुड़ती हैं।

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