10 January 2026

जरूरी है......

जरूरी है
दिन, दोपहर और 
उजाले से परे
कभी -कभी
अंधेरे का होना
घने कोहरे का होना
और एकांत का कोना
जहां 
आत्ममुग्धता के चरम पर
आत्मचिंतन की -
वास्तविकता में
मेरे जैसा कोई
चख सके स्वाद
नीम जैसी-
वास्तविकता का।
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~यशवन्त माथुर©
10012026

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