10 January 2026
जरूरी है......
जरूरी है
दिन, दोपहर और
उजाले से परे
कभी -कभी
अंधेरे का होना
घने कोहरे का होना
और एकांत का कोना
जहां
आत्ममुग्धता के चरम पर
आत्मचिंतन की -
वास्तविकता में
मेरे जैसा कोई
चख सके स्वाद
नीम जैसी-
वास्तविकता का।
.
~यशवन्त माथुर©
10012026
04 January 2026
गलतियाँ ........
कुछ गलतियाँ
गलती से हो जाती हैं
कुछ नासमझी,
नादानी से
कुछ भावनाओं में बहकर
अनचाहा ही
कुछ कहकर
कुछ गलतियाँ
छोड़ जाती हैं
अपनी खरोंचों के निशान
ऐसी जगहों पर
जिनपर नजर पड़े बिना
पूरा नहीं होता
किस भी रास्ते पर
कोई भी सफर।
-यशवन्त माथुर©
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01 January 2026
नव वर्ष
नयी उम्मीदों के साथ
नयी बातों के साथ
नए ख्यालों के साथ
ख्वाब सबके पूरे हों ।
जो बरसों से अधूरे रहे
अनकहे-अनसुने रहे
चाहे जितने प्रकार हों
शब्द सब साकार हों।
नया सूरज कुछ कहता रहे
हर दिन कुछ बनता रहे
रात का अंधेरा छँटता रहे
प्रेम भाव बँटता रहे।
नववर्ष!
आशा का प्रतीक हो
उल्लास से व्यतीत हो
तिनका-तिनका खुशियों से
घर-आँगन रोशन हो।
~यशवन्त माथुर©
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