28 February 2011
ये डायरी के पन्ने
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[चित्र साभार:गूगल सर्च ] कुछ बातें जो अक्सर घुमड़ती हैं मन में कुछ अच्छी कुछ बुरी कुछ खुशी कुछ गम कह देता हूँ बिना कुछ सोचे समझे ...
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25 February 2011
सूरज से मैंने कहा....
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सूरज से मैंने कहा कल थोड़ी देर से आना कुछ देर ठहर कर मुझ से आज थोड़ी और बात कर लो चाँद भी कुछ देर कर लेगा विश्राम तुम्हारे जाने तक कुछ द...
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23 February 2011
उसकी खता क्या थी?
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आना चाहती थी वो तुम्हारे जीवन में तुम्हारा अक्स बनके बिखेरने को खुशियाँ कि उसकी हर अदा पे मुस्कुराहटें तुमको भी मिलती जीती वो भी कुछ पल...
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20 February 2011
मै,तुम और हम
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जो मैं हूँ वो तुम नहीं हो सकते जो तुम हो वो हम नहीं हो सकते फिर भी पड़ते है सभी मैं तुम और हम की लड़ाई में आखिर क्या रखा है इस दुश्मनी की खाई ...
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19 February 2011
चुनाव आयोग को एक सुझाव
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बढते इंटरनेट के प्रयोग के इस दौर में अब चुनाव आयोग को ऑनलाइन वोटिंग के विकल्प पर भी विचार करना चाहिए. इस सम्बन्ध में मेरा एक आलेख 'हिन्...
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18 February 2011
पर्दा
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[1] अक्सर देखता हूँ घरों पर लटके पर्दों को कोशिश करता हूँ उस पार झाँकने की रुक जाता हूँ बस कुछ सोच कर या कहूँ कि खुद को रोक लेता हूँ...
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16 February 2011
क्या लिखूं?
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सामने रखा कोरा कागज़ एकटक देख रहा है मुझ को इस उम्मीद में कि शायद कुछ अक्षर लिखकर उसको सहेज लूँ मैं भी अलसाई आँखों से उसे देख रहा हूँ रोती ...
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14 February 2011
खिलता हुआ चमन हो
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आज न मंदिर है न मस्जिद है न गिरिजा,न गुरुद्वारा है दिल ही है मंदिर आज सब को दिल्लगी का सहारा है न रही मीलों की दूरियां न वो तड़प, हया का किन...
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12 February 2011
बस लिखता रहूँ!
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सोच जो बदल जाती शब्दों में शब्द जो अभिव्यक्ति बनकर गुन गुनाए जाते स्वरों में उन स्वरों को मैं अपनी आवाज़ देता रहूँ बस लिखता रहूँ! है ये जीवन...
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