28 September 2011
उसका जीवन....
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रोज़ पीठ पर बोझा लादे वो दिख जाता है किसी दुकान पर पसीने से तर बतर उसके चौदह बरस के शरीर पर बदलते वक़्त की खरोचें अक्सर दिख जाती हैं कभी बालू ...
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23 September 2011
परिंदों का मन
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कितना मुक्त होता है परिंदों का मन पल मे यहाँ पल मे वहाँ पल मे ज़मीं पर पल मे गगनचुंबी उड़ान निश्छल ,निष्कपट सीमाओं के अवरोध से रहित पू...
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17 September 2011
कुछ लिखना है
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कुछ लिखना है किसी के लिये एक वादे के लिये जो अभी अभी किया है किसी से। वो कहीं दूर कर रहा है इंतज़ार मेरे गुमनाम शब्दों का न जाने क्यो...
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14 September 2011
वो रो रही है
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वो * रो रही है इसलिए नहीं कि वक़्त के ज़ख़्मों से आहत हो चुकी है इसलिए नहीं कि लग रहा है प्रश्न चिह्न उसके अस्तित्व पर इसलिए नहीं कि ...
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11 September 2011
पानी आने पर....
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शाम के वक़्त जब आता है नलों मे पानी हलचल सी दिखती है हर तरफ कहीं धुलने लगते हैं कपड़े हाथों से वॉशिंग मशीनों से कहीं धुलती हैं कारें प...
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10 September 2011
उड़ना चाहती हूँ
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[कभी कभी कुछ चित्रों को देख कर बहुत कुछ मन मे आता है इस चित्र को देख कर जो मन मे आया वह प्रस्तुत है। यह चित्र अनुमति लेकर सुषमा आहुति जी ...
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07 September 2011
बदलती सुबह
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सुबह सुबह सूरज के निकलने तक कभी सुनाई देती थी पास की मस्जिद से आती अज़ान की आवाज़ मंदिर मे बजते घंटों की आवाज़ चिड़ियों की चहचहाहट जिसके सुर म...
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05 September 2011
वो स्कूल के दिन और मेरी टीचर्स
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(स्कूल ड्रेस मे वह बच्चा जिसका ब्लॉग आप पढ़ रहे हैं ) आ ज शिक्षक दिवस है। पीछे लौटकर बीते दिनों को देखता हूँ, याद करता हूँ तो मन होता ह...
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01 September 2011
मुक्त होना चाहता हूँ --
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(1) बदन को छू कर निकल जाने वाली हवा से गर्मी की लू से जाड़ों की शीत लहर से मन भावन बसंत से, बरसते सावन से हर कहीं दिखने वाली रोल चोल...
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