26 March 2014
वक़्त के कत्लखाने में -3
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वक़्त के कत्लखाने में सांसें गिनती जिंदगी कितने ही एहसासों को खुद के भीतर दबाए हर पल मांगती रहती है मन्नतें इस दुनिया के पार जाने की ...
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23 March 2014
वक़्त के कत्लखाने में -2
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वक़्त के कत्लखाने में सिमट कर बैठने की कोशिश करती रूह चाह कर भी नहीं निकल पाती बाहर बंद पिंजरे से ... हो नहीं पाती आज़ाद कई कोशिशों के...
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20 March 2014
वक़्त के कत्लखाने में-1
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वक़्त के कत्लखाने में कट कट कर ज़िंदगी नयी उम्मीदों की आस में झेलती है यादों के चुभते हरे ज़ख़्मों की टीस.... ज़ख्म - जिनके भरने का भान...
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17 March 2014
देखो होली का हुड़दंग
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लाल हरा पीला नीला थोड़ा सूखा थोड़ा गीला भर पिचकारी उड़ता रंग देखो होली का हुड़दंग बच्चा बच्चा भीगा भीगा थोड़ा मस्त थोड़ा खीझ...
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09 March 2014
हर कोई है यहाँ अपने मे मशगूल
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हर कोई है यहाँ अपने मे मशगूल किसी को बीता कल याद है और कोई आज मे ही आबाद है कोई डूबा है आने वाले कल की चिंता में कोई बेफिकर देखता ज...
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07 March 2014
गहराती रात के सूनेपन में .......
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गहराती रात के सूनेपन में सरसराती आ रही है एक आवाज़ कि कहीं से झुरमुटों की ओट से या किसी और छोर से जैसे कोई पुकार रहा हो किसी को; क...
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01 March 2014
पौधे से सीखो
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उठ जाओ कितने ही ऊपर देखो चाहे गगन को छूकर जुड़े रहना धरती से देखो बच्चों ! प्यारे पौधे से सीखो। वो तुम से कुछ नहीं लेता है...
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24 February 2014
ई वोटिंग आज की आवश्यकता
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आज के समाचार पत्र में जब यह खबर (देखें चित्र लाल-पीले घेरे में) पढ़ी तो 2 वर्ष पूर्व लिखा अपना एक आलेख याद आ गया। राज्य सभा सां...
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22 February 2014
अब भी वहीं हैं .....
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सोचता हूँ न जाने कब मौन को मिली होगी भाषा न जाने कब गड़े गए होंगे अक्षर और न जाने कब अक्षर अक्षर जुड़ कर बने ह...
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