04 March 2021

वो दिन लौट के आएंगे......

बोल  निराशा के, कभी तो मुस्कुराएंगे।  
जो बीत चुके दिन, कभी तो लौट के आएंगे।  

चलता रहेगा समय का पहिया, 
होगी रात तो दिन भी होगा।  
माना कि मावस है कई दिनों की, 
फिर अपने शवाब पे पूरा चाँद भी होगा। 

आज काँटे हैं, कल इन्हीं में फूल खिल जाएंगे। 
ये कुछ पल की ही बात है, वो दिन लौट के आएंगे।

-यशवन्त माथुर©
04032021

22 comments:

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  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 05-03-2021) को
    "ख़ुदा हो जाते हैं लोग" (चर्चा अंक- 3996)
    पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    धन्यवाद.


    "मीना भारद्वाज"

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  2. सच समय कैसा भी हो कट ही जाता है
    बहुत अच्छी प्रस्तुति

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  3. उम्मीद पे दुनिया क़ायम है यशवंत जी । कहाँ तक ये मन को अंधेरे छलेंगे, उदासी भरे दिन कभी तो ढलेंगे ।

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  4. आशा के दीप जलाती सुंदर कृति..

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  5. आशा का संचार करती सुन्दर प्रस्तुति।

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  6. बहुत सुंदर... आने वाले समय के प्रति विश्वास जगाता गीत
    साधुवाद 🙏

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  7. आज काँटे हैं, कल इन्हीं में फूल खिल जाएंगे।
    ये कुछ पल की ही बात है, वो दिन लौट के आएंगे।

    बहुत खूब,सादर नमन आपको

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  8. वाह!बहुत सुंदर।

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  9. बहुत सुंदर आशावादी रचना 🌹🙏🌹

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  10. सुंदर रचना !
    जो बीत चुके वे दिन तो कभी नहीं लौटते, अतीत मृत हो जाता है उसमें कोई फूल नहीं खिलता, वर्तमान ही वह भूमि है जहाँ अंकुरण हो सकता है, इसी क्षण में यदि मुस्कुराने की जो नहीं ठानता वह भविष्य में भी मुस्कुराएगा, पक्का नहीं है, क्योंकि वर्तमान ही वह बीज है जो भविष्य में वृक्ष बनेगा, अतीत नहीं,

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