नियति की
हर क्रिया में
कर्म की प्रतिक्रिया सा
निर्बाध निर्विरोध
लेता हूं अवश्य ही
प्रतिशोध
किसी दर्पण पर
बनते तीखे प्रतिबिम्ब
और परावर्तन
के साथ
चाह कर भी
कोई बच नहीं सकता
मेरी थपकी
और वार से
क्योंकि मैं
कोई चमत्कार नहीं
सिर्फ
तुम्हारा समय हूं।
-यशवन्त माथुर©
एक निवेदन-
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आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 26 अगस्त 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
ReplyDeleteअथ स्वागतम शुभ स्वागतम।
सुंदर
ReplyDeleteबढ़िया लिखा है ।
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