29 December 2015
मैं वही हूँ,मैं वहीं हूँ
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~यशवन्त यश©
20 December 2015
मैंने तो नहीं कहा........
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मैंने तो नहीं कहा कि बेचैन हूँ इस दर पर सबको देखने को .... न बिछा रखे हैं लाल कालीन बैठने को न टहलने को .... फिर भी कुछ हैं जो आ...
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16 December 2015
आधे टिकट के सफर का खत्म होना -गिरिराज किशोर, वरिष्ठ साहित्यकार
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स रकार ने आधे टिकट की कहानी पर पूर्ण विराम लगा दिया है। बच्चों को अंग्रेजों के जमाने से मिलने वाला आधा टिकट अब रेलवे की टिकट खिड़की पर ...
12 December 2015
कहाँ तलाशूँ.....
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सोच रहा हूँ कहाँ तलाशूँ गुमशुदा न्याय को जो गुलाम हो चला है अमीरों की जेबों का ..... न्याय की मूर्ति के हाथों में अब बराबर तौलने वाल...
05 December 2015
पत्थर नहीं समझ पाते जज़्बातों को.......
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आना जाना तो लगा ही रहता है मिलना बिछड़ना तो लगा ही रहता है कुछ लोग आग लगाते हैं कुछ बुझाते भी हैं अपनी तरह से जीना सिखाते भी हैं समझने...
03 December 2015
कुछ लोग 34
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मतलब निकल जाने के बाद अपने मन की हो जाने के बाद दोस्त के मुखौटे में छुपे कुछ दगाबाज लोग दिखाने लगते हैं अपने असली रंग । उन्हें नहीं...
02 December 2015
तस्वीरें
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रंग बिरंगी उजली काली तस्वीरें इंसानी चेहरों की तरह होती हैं जिनके सामने कुछ और पीछे कुछ और कहानी होती है। कुछ झूठ की बुनियाद पर खड़...
01 December 2015
सब
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सबको हक है सबके बारे में धारणा बनाने का ...... सबको हक है अपने हिसाब से चलने का ......... सबकी मंज़िलें अलग अलग होती हैं कुछ थोड़ी पा...
2 comments:
30 November 2015
कुछ लोग-33
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अपना दिमाग लगाए बिना फर्जी रिश्तों के जाल में फाँस कर कभी भाई बना कर कभी बहन बन कर कुछ लोग अपना उल्लू सीधा होते ही खड़ी कर लेते हैं अप...
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