22 November 2014
नया सफर
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फिर शुरू हुआ चलती साँसों का एक नया सफर उसी राह से जिसकी लंबाई हर पड़ाव पर और बढ़ जाती है मील के इस पत्थर से अगले पत्थर के आने तक ब...
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17 November 2014
पुरस्कार बनाम लेखक की आज़ादी
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आ ज के दौर में कौन ऐसा होगा जो पुरस्कार पाने को लालायित न होगा। चाहे वह कोई छोटा मोटा पुरस्कार हो या बड़े से बड़ा....पुरस्कार को ठुकराने क...
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12 November 2014
परिवर्तनों के साथ.......
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जीवन के स्वाभाविक अस्वाभाविक परिवर्तनों के साथ हम चलते रहते हैं अपनी राह करते रहते हैं अपने कर्म निभाते रहते हैं अपना धर्म फिर भी...
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08 November 2014
पगडंडियां .....(मृगतृष्णा जी की कविता)
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कल शाम को फेसबुक पर मृगतृष्णा जी की यह कविता पढ़ कर इसे अपने ब्लॉग पर साझा करने से खुद को न रोक सका। आप भी पढ़िये- (1) पगडंडियां मौके न...
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06 November 2014
बीते दौर की बातें
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कभी कभी बीते दौर की कुछ बातें यादों के बादल बन कर छा जाती हैं मन के ऊपर बना लेती हैं एक कवच रच देती हैं एक चक्रव्यूह जिसे भेदना न...
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04 November 2014
कुछ लोग -7
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कुछ लोग होते हैं कोरे पन्ने की तरह सफ़ेद जिनका मन ज़ुबान और दिल ढका होता है पारदर्शक टिकाऊ आवरण से.... आवरण ! जो रहता है बे असर ...
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01 November 2014
वो निकलती है रोज़ मेरे घर के सामने से
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पीठ पर लादे भारी भरकम सा बस्ता जिसके भीतर उसका हर ज्ञान सिमटता कभी करती हुई बातें संगी साथियों से वो निकलती है रोज़ मेरे घर के सामने...
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23 October 2014
आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ !
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इन जलते हुए हजारों दीयों में ढूंढ रहा हूँ एक अपना दीया जिसकी रोशनी सैकड़ों अँधेरों के उस पार पहुँच कर दिखा दे एक लौ उन उम्मीदों की ...
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16 October 2014
अच्छे दिन+अच्छे दिन
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आटे दाल का भाव न पूछो भरे बाज़ार पहेली बूझो गुम हो गया चिराग का जिन्न अच्छे दिन अच्छे दिन। आलू ,गोभी अकड़ दिखाता मंडी जाना रास ...
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