नयी उम्मीदों के साथ
नयी बातों के साथ
नए ख्यालों के साथ
ख्वाब सबके पूरे हों ।
जो बरसों से अधूरे रहे
अनकहे-अनसुने रहे
चाहे जितने प्रकार हों
शब्द सब साकार हों।
नया सूरज कुछ कहता रहे
हर दिन कुछ बनता रहे
रात का अंधेरा छँटता रहे
प्रेम भाव बँटता रहे।
नववर्ष!
आशा का प्रतीक हो
उल्लास से व्यतीत हो
तिनका-तिनका खुशियों से
घर-आँगन रोशन हो।
~यशवन्त माथुर©
शुभकामनाएं नववर्ष पर |
ReplyDeleteयह कविता पढ़कर मन अपने आप हल्का हो जाता है। आप नए साल की उम्मीद को बहुत सहज और सच्चे शब्दों में रखते हैं। मुझे अच्छा लगा कि आप बड़े वादों की जगह छोटे-छोटे सुखों की बात करते हैं। नए सूरज, अंधेरे के छँटने और प्रेम के बँटने की पंक्तियाँ दिल से जुड़ती हैं।
ReplyDelete