प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

10 February 2026

इंसान और कुत्ता


इंसान 
इंसान होता है 
और 
कुत्ता, 
कुत्ता होता है 
दोनों प्रजातियों में 
स्वाभाविक अंतर होता है। 
इंसान 
जन्म से 
मरण तक 
कभी खुश होता है 
कभी रोता है 
संघर्षों में 
गिरता है 
उठता है 
चलता-फिरता है 
जागता है 
सोता है 
कुत्ते के साथ भी 
ऐसा ही होता है। 
कुत्ता 
दौड़ता है 
भागता है 
आवरगर्दी करता है 
खुले आसमान के नीचे 
जागता है 
सोता है 
दुखी होता है 
तो खुल कर रोता है 
किसी का डर 
उसको नहीं होता है। 
कुत्ता, 
कुत्ता ही होता है 
उसे नहीं होती 
नौकरी की चिंता 
न घरवालों की चिंता 
नहीं होता 
नातों-रिश्तों का झमेला 
उसके जीवन में 
न परीक्षा का झंझट 
न ही प्रतिशत का 
उसे एहसास नहीं होता 
भूख का 
न प्यास का 
उसे शरण देने वाला 
कोई अमीर इंसान 
उसे सुला सकता है 
मखमली गद्दे पर 
और कोई फुटपाथिया 
उसे तकिया बना कर 
खुद सोता है 
रख कर सिरहाने पर। 
इंसान 
सिर्फ अमीर ही अच्छा होता है 
और गरीब इंसान से 
लाख गुना बेहतर होता है 
आज के दौर में 
आवारा कुत्ता होना। 
.
-यशवन्त माथुर© 
  एक निवेदन- 
इस ब्लॉग पर कुछ विज्ञापन प्रदर्शित हो रहे हैं। आपके मात्र 1 या 2 क्लिक मुझे कुछ आर्थिक सहायता कर सकते हैं। 

No comments:

Post a Comment

+Get Now!