इधर भी खड़े
कुछ उधर भी खड़े
चरणों में लिपटे पड़े
सब चारण तैयार हैं.... ।
हाथों में स्मृति चिह्न लिए
मुद्रा-प्रशस्ति गिन लिए
गुण, गुड़ शक्कर हो लिए
अंग वस्त्र धारण सरकार हैं .... ।
सब चारण तैयार हैं......
मौन व्रत स्वाभाविक है
अच्छा बुरा मन माफिक है
जो अपने खुद का मालिक है
उस साधारण पर वार हैं .... ।
सब चारण तैयार हैं......।
~यशवन्त यश©
कुछ उधर भी खड़े
चरणों में लिपटे पड़े
सब चारण तैयार हैं.... ।
हाथों में स्मृति चिह्न लिए
मुद्रा-प्रशस्ति गिन लिए
गुण, गुड़ शक्कर हो लिए
अंग वस्त्र धारण सरकार हैं .... ।
सब चारण तैयार हैं......
मौन व्रत स्वाभाविक है
अच्छा बुरा मन माफिक है
जो अपने खुद का मालिक है
उस साधारण पर वार हैं .... ।
सब चारण तैयार हैं......।
~यशवन्त यश©