प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

यदि आप चाहें तो हमें कुछ सहयोग कर सकते हैं

16 October 2012

उसे महफूज रखना

सुबह से सुन रहा हूँ
फिल्मी पैरोडी पर
गूँजते भजनों का शोर
कभी तेज़
कभी धीमा संगीत
जिसके पार्श्व में
दबते से ,सिकुडते से बोल
न जाने कौन से
खोल में छुपे हुए हैं
हर ओर
बह रहा है 
सिर्फ संगीत ही संगीत
जिसके साथ
बहता जा रहा हूँ
मैं भी
गुनगुनाता जा रहा हूँ
फिल्मी गाना
अखबार मे छपी
मलाला की तस्वीर की
कल्पना करते हुए 
दुआ करते हुए
देवी माँ
उसे महफूज रखना
धरती की गोद में।

©यशवन्त माथुर©

21 comments:

  1. बहुत अद्भुत अहसास...सुन्दर प्रस्तुति .

    ReplyDelete
  2. आजकल फ़िल्मी पैरोडी भजनों का चलन बढ़ गया है,,,और सुनने में अच्छे
    भी लगते है,लेकिन पुराने भजनों जैसी बात आजकल नही है,,,

    यशवंत जी,मै आपके हर पोस्ट पर आता हूँ किन्तु आप मेरे पोस्ट पर नही आते,,,आइये स्वागत है,,,
    RECENT POST ...: यादों की ओढ़नी
    RECENT POST: माँ,,,

    ReplyDelete
  3. सच बयाँ कर दिया

    ReplyDelete
  4. चर्चा मंच सजा रहा, मैं तो पहली बार |
    पोस्ट आपकी ले कर के, "दीप" करे आभार ||
    आपकी उम्दा पोस्ट बुधवार (17-10-12) को चर्चा मंच पर | सादर आमंत्रण |
    सूचनार्थ |

    ReplyDelete
  5. बिल्कुल सही लिखा है यशवंत जी ... फिल्मी धुनों के पीछे श्रद्धा के स्वर एसुनाई ही नहीं देते ...

    ReplyDelete
  6. फ़िल्मी पैरोडी पर आधारित भजन मे श्रद्धा भाव नही आपाता..लगता है कि हम कोई फिल्मी गीत सुम्रहे है..सुन्दर प्रस्तुति..

    ReplyDelete
  7. भक्त कि भक्ति तो मलाला जैसी होती है जिसे मां भी महफूज रखेगी ,यशवंतजी आपका मेरे ब्लॉग पर स्वागत है |आभार सार्थक काव्य पर |

    ReplyDelete
  8. देवी माँ
    उसे(Sabako) महफूज रखना
    धरती की गोद में।
    Shubhkamnayen !!

    ReplyDelete
  9. बहुत बढ़िया..सच बात...

    सस्नेह
    अनु

    ReplyDelete
  10. फ़िल्मी पैरोडी भजनों के बारे में क्या कहूँ ... ऐसा लगता है खाने के प्लेट पर कोई जूता रख दिया हो ... जूते कितने भी सुन्दर हो पर खाया नहीं जाता ...

    खैर आपकी कविता अच्छी लगी ... जानवरों के समाज में लढती हुई एक इंसान के बारे में आपने सोचा यह अच्छा लगा ...

    ReplyDelete
  11. सही कहा यशवंत !
    फिल्मी गीतों पर भजनों की Parody.... सच में Horrible! बहुत गुस्सा आता है...मगर क्या करें ? अपनी जनता में कुछ ऐसे लोग भी हैं..जिन्हें इस बात की समझ ही नहीं... :(
    ~God Bless !!!

    ReplyDelete
  12. मलाला के हौसले को नमन ..... देवी माँ महफूज़ रखे

    ReplyDelete
  13. मलाला बच्ची है और उसके मासूमियत को तालिबान नहीं देख पाए. काहे के तालिबान हैं?

    ReplyDelete
  14. सत्य !!!

    ReplyDelete
  15. बधाई , नवरात्र मंगलमय हो .
    प्रश्न विचारणीय है ..

    ReplyDelete
  16. भाई प्रदीप कुमार साहनी के चर्चा मंच के माध्यम से आपका लिंक मिला, बहुत प्रसन्नता हुई, उनके माध्यम से कुछ अच्छा पढ़ने को मिला..... आपकी बेहतरीन प्रस्तुति।

    ReplyDelete
  17. देवी माँ
    उसे(Sabako) महफूज रखना
    धरती की गोद में।...प्रभावशाली रचना.....

    ReplyDelete
  18. सही बात है,,
    फ़िल्मी गीतों पर भगवान के गाने अच्छे नहीं लगते...
    नवरात्री की शुभकामनाएँ...
    :-)

    ReplyDelete
  19. सुन्दर रचना

    ReplyDelete
  20. बहुत ही अच्छा लिखा आपने .

    ReplyDelete

Popular Posts

+Get Now!