(विश्व गौरैया दिवस पर विशेष)
दोष मेरा ही है
हरे जंगलों को काट कर
मैंने अब बसा लिया हैं
कंक्रीट का आशियाना
गमलों मे रोप दिये हैं
बौने बोन्साई
दोष मेरा ही है
और बहाना ये भी है
कि इस महंगाई में
मैं नहीं बिखेर सकता
गेहूं और बाजरा
घर की छत पर
इतनी मेहनत से
लाइन में लग कर
लड़कर झगड़ कर
गली के उस टूटे नल से
लाता हूँ और सहेजता हूँ
अपने पीने का पानी
बोलो गौरैया रानी
मैं कैसे करूँ
तुम्हारी सेवा ?
मैं सब कुछ कर सकता हूँ
अपने लिये
पर तुम्हारे लिये .......?
मेरे पास
सैकड़ों बहाने हैं।
~यशवन्त माथुर©