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01 January 2023

नया साल कुछ इस तरह मने

इंसान 
इंसान ही रहे 
शैतान न बने। 
 
नया साल 
कुछ इस तरह मने। 

कुछ ऐसा हो 
कि हर भूखे को रोटी मिले 
खुले आसमां के नीचे 
कोई न झोपड़ी मिले। 

कुछ ऐसा हो 
कि मुरझाए न फूल 
जो कोई खिले 
हों शिकवे सारे दूर 
गले जब कोई मिले। 

भले ही कोहरा 
पसरा हुआ हो बाहर 
दिलों के भीतर 
हर दिन किसी त्योहार सा मने। 

नया साल 
कुछ इस तरह मने। 


-यशवन्त माथुर©
01012023 

01 January 2019

नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ!

खिलें कलियाँ खुशियों की जो
बन कर फूल न कभी मुरझाएँ।
नए वर्ष के हर एक दिन में
सभी चलें कभी न रुक पाएँ।

जीवन एक संघर्ष है माना
कम हो जाएँ पथ के काँटे।
एक थे, हम यूं  रहें एक ही
खुद को भी न खुद से बाँटें।

जलें बातियाँ दीयों की जो
रंग जीवन के सदा दिखाएँ। 
नए वर्ष के हर एक दिन में
मुस्कुराहटें ही मिलती जाएँ।
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-यशवन्त माथुर ©
01/01/2019




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