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07 January 2025

40 पार के पुरुष-4

अपनी सफलता-
असफलता 
उसके कारणों 
और उनसे उपजी 
क्रिया-प्रतिक्रिया का 
प्रतिफल 
इसी जन्म में भोगते 
40 पार के 
कुछ पुरुष 
अक्सर 
इसलिए हार जाते हैं 
क्योंकि उन्होंने 
जीता होता है 
दुनिया को 
अपने संस्कारी -
संकोची 
स्वभाव से 
जो अगर न होता 
उनके भीतर 
तो शायद 
उनकी उच्छृंखलता 
इसी जनम में 
बन जाती 
उनका काल। 

-यशवन्त माथुर©
 
07 01 2025 
 
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25 June 2024

40 पार के पुरुष-3

40 पार के पुरुष
बंद कर देते हैं
नए सपने देखना
क्योंकि
उनके पुराने
अधूरे सपने
बाई फोकल
और प्रोग्रेसिव लेंस की
उधेड़बुन में
कहीं अटक कर
अनकहे 
और अनसुने ही
रह जाते हैं।
क्योंकि 
उनमें से कुछ
अपवादों की झिझक में
चाह कर भी
अपने जज़्बात 
कह नहीं पाते हैं।

40 पार के पुरुष
वर्तमान को
नियति मान कर
यथास्थिति में
पथरीले रास्तों पर
चलते हुए
विलुप्त हो जाते हैं
तथाकथित अपनों की 
याददाश्त की
परिधि से।

-यशवन्त माथुर©
 
25 जून 2024

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04 February 2024

40 पार के पुरुष - 2

जिम्मेदारियों का बोझा ढोते 
40 पार के पुरुष
जीवन के 
तिलिस्मी रंगमंच पर
चाह कर भी नहीं निभा सकते
खुद का मन पसंद किरदार
वो तो बस
कठपुतली होते हैं
नाचते रहते हैं 
किसी और की 
थामी हुई डोर के सहारे
ढूंढते रहते हैं किनारे
करते रहते हैं
पुरजोर कोशिशें 
जानकर की हुई 
अनजान गलतियों के 
निशान मिटाने की।
40 पार के
कुछ पुरुषों की
पटकथा 
फूलों के सपनों
और कांटों की वास्तविकता 
को खुद में समेटे हुए
सिर्फ अनिश्चित ही होती है।

-यशवन्त माथुर© 
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20 December 2023

40 पार के पुरुष -- 1

यूं तो 
40 पार के कई पुरुष 
पा चुके होते हैं 
मनचाहा मुकाम 
लेकिन उनमें भी 
कुछ रह ही जाते हैं 
अधूरी इच्छाओं को साथ लिए 
क्योंकि उनके संघर्ष 
उनकी महत्वाकांक्षाओं से 
कहीं अधिक बड़े होते हैं 
जिनकी पूर्णता की जद्दोजहद में 
वो उठते हैं- गिरते हैं 
गिरते हैं-उठते हैं 
40 पार के संघर्षशील पुरुष 
अपने सफल हम उम्रों के
सुफल देखते हुए 
बुनते ही रह जाते हैं 
कुछ ख्वाब 
जिनका पूर्ण होना 
असंभव ही होता है 
काल के इस पड़ाव पर।  

-यशवन्त माथुर©
20  दिसंबर 2023 
 
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