कुछ लोग
वक़्त से
पाले रहते हैं उम्मीदें
इस आस में
कि उसके बीतने या
बदलने के साथ ही
बदल सकेगा
कुछ अपनों का
चरित्र -
चेहरा और सोच;
लेकिन
प्रगीतिशीलता के मुखौटे
और काली वास्तविकता का
बड़ा अंतर,
पुरातन रूढ़िवादिता ,
अहं और सर्वोच्चता की
अवधारणा
शायद
निकलने नहीं देती
कुछ लोगों को
उनके बाह्य आवरण से बाहर
और शायद इसीलिए
उनके अपनों की
उम्मीदें तोड़ देती हैं दम
चरम पर पहुँचने के
बहुत पहले
छटपटाते हुए ।
08022026
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