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13 April 2011

मैं कौन हूँ?

शायद मुझ को भुला कर
तुमने लगा दिया है
मेरे आस्तित्व पर
प्रश्नचिह्न
और मैं
खुद को
आईने में देख कर
पूछ रहा  हूँ
मैं कौन हूँ?

20 comments:

  1. kya kahu???????? sabd nhi hai..bhut emotinal panktiya hai...

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  2. सुंदर ... ऐसा समय भी आ जाता है....

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  3. क्या बात है...यशवंत जी...आपने तो बहुत ही कम शब्दों में बड़ी गुढ़ और प्रेममयी भावसरिता बहा दी...बहुत सुंदर।

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  4. अति सुन्दर.............

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  5. निशब्द हूँ।

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  6. अति सुन्दर| धन्यवाद|

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  7. बहुत सुंदर रचना.... अंतिम पंक्तियों ने मन मोह लिया...

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  8. आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आयी..
    सुन्दर अभिव्यक्ति है आपकी..
    ऐसे प्रश्नचिन्ह कई बार लग जाते हैं जिन्दगी में...!

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  9. yahi to savaal hai laakh take kaa ,kaun hai ham....

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  10. मुझ को भूल कर ही
    अस्तित्वमयी कर दिया मुझको
    तुम्हारी इन्कार ही स्वीकार कर
    तुमसा ही बना गयी मुझको ......

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  11. बहुत सुन्दर. आम तौर पर सबने ये सवाल खुद से पूछा ही होगा, कभी न कभी.

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  12. बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आपको हार्दिक धन्यवाद!

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  13. आंतरिक पीड़ा की सहज अभिव्यक्ति...

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  14. बेवजह तो खुद से सवाल तो नही करते हैं लोग ..
    जिन्दगी कई बार हमे ही हमारे सामने खड़ा कर देती है
    बहुत गहरी अभिव्यक्ति ...और उतने ही सुन्दर शब्द |

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  15. आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद!

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  16. बहुत सुंदर।

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