प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

यदि आप चाहें तो हमें कुछ सहयोग कर सकते हैं

12 December 2015

कहाँ तलाशूँ.....

सोच रहा हूँ
कहाँ तलाशूँ
गुमशुदा न्याय को
जो गुलाम हो चला है
अमीरों की जेबों का .....
न्याय की मूर्ति के हाथों में
अब बराबर तौलने वाला
सिर्फ तराजू ही नहीं होता
उसके हाथों में
होती हैं
नोटों की गड्डियाँ .....
इस मूर्ति की
तीसरी आँख
अब उसी तरफ खुलती है
जिस तरफ के पलड़े पर
वजन होता है ज़्यादा .......
और हल्का पलड़ा
अपनी बेगुनाही का सुबूत
देते देते
डूब जाता है
आंसुओं के सैलाब में।

~यशवन्त यश©

No comments:

Post a comment

मॉडरेशन का विकल्प सक्षम होने के कारण आपकी टिप्पणी यहाँ प्रदर्शित होने में थोड़ा समय लग सकता है।

कृपया किसी प्रकार का विज्ञापन टिप्पणी में न दें।

केवल चर्चामंच का लिंक ही दिया जा सकता है, इसके अलावा यदि बहुत आवश्यक न हो तो अपने या अन्य किसी ब्लॉग का लिंक टिप्पणी में न दें, अन्यथा आपकी टिप्पणी यहाँ प्रदर्शित नहीं की जाएगी।

Popular Posts

+Get Now!