प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

यदि आप चाहें तो हमें कुछ सहयोग कर सकते हैं

24 December 2020

कि मौत आने को है....

हर ग़म जाने को है कि मौत आने को है,
चुटकी भर खुशियाँ धूल में मिल जाने को हैं।

बेइंतिहा शिकायतों के वजूद पर मेरा सबर,
पछता रहा कि जो बीता वो कल आने को है।

धोखा इस बात का था कि उम्मीदें साहिल पर थीं, 
मैं  घिसटता ही रहा  कि साँसें टूट जाने को हैं।  

ठहर जा रे वक़्त! और बीत कर क्या होगा?
जो तू करने को था कर ही जाने को है। 

-यशवन्त माथुर ©
24122020 

14 comments:

मॉडरेशन का विकल्प सक्षम होने के कारण आपकी टिप्पणी यहाँ प्रदर्शित होने में थोड़ा समय लग सकता है।

कृपया किसी प्रकार का विज्ञापन टिप्पणी में न दें।

केवल चर्चामंच का लिंक ही दिया जा सकता है, इसके अलावा यदि बहुत आवश्यक न हो तो अपने या अन्य किसी ब्लॉग का लिंक टिप्पणी में न दें, अन्यथा आपकी टिप्पणी यहाँ प्रदर्शित नहीं की जाएगी।

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 25-12-2020) को "पन्थ अनोखा बतलाया" (चर्चा अंक- 3926) पर होगी। आप भी सादर आमंत्रित है।
    धन्यवाद.

    "मीना भारद्वाज"

    ReplyDelete
  2. बहुत सार्थक और खूबसूरत अशआर।

    ReplyDelete
  3. दर्द में सराबोर हैं आपके ये अशआर यशवंत जी ।

    ReplyDelete
  4. जिंदगी की कशमकश को खूबसूरती से बयान करते अश्यार

    ReplyDelete
  5. सशक्त और सारगर्भित रचना..।

    ReplyDelete
  6. बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
  7. सुंदर और सार्थक प्रस्तुति के लिए आभार और शुभकामनाएं।सादर।

    ReplyDelete
  8. सुंदर व सारगर्भित रचना।

    ReplyDelete
  9. क्या बात!
    बहुत सुंदर।

    ReplyDelete
  10. बहुत खूब ! शानदार रचना , हृदय स्पर्शी ।

    ReplyDelete
  11. बहुत ही गहराई तक छूने वाली सार्थक रचना हेतु साधुवाद 🙏🏻

    ReplyDelete
  12. धोखा इस बात का था कि उम्मीदें साहिल पर थीं,
    मैं घिसटता ही रहा कि साँसें टूट जाने को हैं।
    दिल को छूती अभिव्यक्ति।

    ReplyDelete
  13. मौत क्योंकर प्रिय हो ए प्रिय..
    सांस क्यों थम जाने को है !!
    वक्त की तासीर कुछ ठंडी गरम सही
    ये भी वक्त बस गुजर जाने को है..

    आपको समर्पित..

    ReplyDelete

Popular Posts

+Get Now!