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16 January 2022

अंतराल

स्वाभाविक होता है 
अंतराल..  
कभी 
आत्ममंथन के लिए
कभी 
एकांत चिंतन के लिए  
और कभी 
बस यूं ही 
कुछ पल के 
सुकून के लिए 
भीड़ से दूर 
या भीड़ के बीच भी 
औपचारिक 
आत्मीयता के साथ भी- 
अलग भी 
अंतराल .. 
अपने साथ 
सहेजता है 
कुछ यादें 
और खुद से किए 
कुछ वादे 
क्योंकि 
अंतराल 
अपनी क्षणभंगुरता में 
बो देता है बीज 
किसी और 
भावी अंतराल के। 

-यशवन्त माथुर©
16012022 

.

9 comments:

  1. गहन भाव सृजन।
    सुंदर रचना।

    ReplyDelete
  2. अंतराल..
    बहुत ही सुंदर, चिंतनपूर्ण भावों का अहसास ।
    सटीक भी ।

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  3. आत्ममंथन और चिंतन की धारा यूँही प्रवाहित होती रहे

    ReplyDelete
  4. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति।

    ReplyDelete
  5. बहुत सुंदर रचना

    ReplyDelete
  6. बहुत ही सुन्दर सृजन

    ReplyDelete
  7. बिलकुल सच कहा आपने यशवन्त जी।

    ReplyDelete
  8. सही कहा आत्ममंथन और एकांत चिंतन के लिए जरुरी है अंतराल..
    बहुत ही सुन्दर
    लाजवाब सृजन।

    ReplyDelete

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