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01 February 2022

भूले हुए रास्ते ....

बीतते समय के साथ 
भूलते हुए 
अपना गुजरा हुआ कल 
हम चलते चले जाते हैं 
अनजान पगडंडियों पर 
जिनपर छूटे हुए 
हमारे कदमों के निशान 
या तो बने रहते हैं स्थायी 
या वह भी 
मिट ही जाते हैं 
एक न एक दिन 
एक कहानी बनकर 
कभी किसी स्वप्न में .. 
किसी और वास्तविकता में 
याद तो आते ही हैं 
हमारे पूरे-अधूरे रास्ते
जिनपर चलकर 
किसी  बीते दौर में 
हमको मिली ही होगी 
अपनी मंजिल 
इसलिए 
भूलना चाहकर भी 
हमारे अवचेतन से 
नहीं निकलते 
भूले हुए रास्ते 
और बीता हुआ कल। 

-यशवन्त माथुर©

7 comments:

  1. बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना

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  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर गुरुवार 03 फ़रवरी 2022 को लिंक की जाएगी ....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!

    !

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  3. हमारे अचेतन से नहीं निकलते
    भूले हुए रस्ते और बीता हुआ कल

    यथार्त महोदय
    भावपूर्ण रचना

    ReplyDelete
  4. यकीनन कोई न कोई मंज़िल मिली है हरेक को अतीत में भी, पर असली मंज़िल की तलाश लिए जाती है आगे ही आगे

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  5. बिल्कुल सही । यादें तो मन में रहती है हैं ।

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  6. खनकते स्वर में सुन्दर रचना को सुनना और पढ़ना भी अच्छा लगा।

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