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02 December 2010

फरीदा

फरीदा !
हाँ यही नाम है उसका
मैली सी फ्रॉक पहने
और एक हल्का सा स्वेटर
डाले
वो आती है रोज़ सवेरे
मेरे घर पर
घंटी बजा कर
हम सब को जगाती है
और सारा कूड़ा लेकर
मुस्कुराते हुए
डाल देती है
अपने ठेले पर।

मैं
देखता रह जाता हूँ
कभी उसको
और कभी
सामने की सड़क पर
आते जाते उसके हम उम्र
बच्चों को
जो बन ठन कर
चलते  जाते हैं
विद्या के मंदिर की ओर।

वो भी
एक नज़र डालती है उन पर
चली जाती है
अगले घर पर दस्तक देने।

रोज़ की तरह
हर सुबह सवेरे
छोड़  जाती है
एक प्रश्न चिह्न
समाज के
मस्तक पर।

-यशवन्त माथुर ©




14 comments:

  1. Wah very nice such a reality.. very gud

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  2. काफी सुंदर तरीके से अपनी भावनाओं को अभिवयक्त किया है ...

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  3. बहुत सुंदर यशवंत जी, ऐसा ही होता है...न जाने कितनी ही फरीदा होंगी जो शिक्षा के महरूम है....जो स्कूल नही जा पाती....सुंदर अभिव्यक्ति....

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  4. Use dekhte mat rahiye...aise ek ya do bachcho ko bhi agar akshar gyaan kara dia to diye se diya jalte der nahi lagegi..amen!!!

    Khair ye kavita apki intelligence k sath sath apki emtional intelligence ko bhi show klarne me kamyaab.. keep writting

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  5. ना जाने समाज में कितनी फरीदा हैं जिन्हें देखकर मन में प्रश्न उठते हैं..... सुंदर ....

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  6. सुंदर प्रस्तुति।

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  7. येभी ज़िन्दगी का एक सच है।

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  8. यह प्रश्नचिंह सोचने को विवश करता है...

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  9. बिल्‍कुल सच्‍ची बात कही है आपने इस रचना में ...

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  10. यशवंत भाई, जीवन की विसंगतियों को आपने बडी बारीक नजर से देखा है। आपकी इस सोच को सलाम करने को जी चाहता है।


    ---------
    ईश्‍वर ने दुनिया कैसे बनाई?
    उन्‍होंने मुझे तंत्र-मंत्र के द्वारा हज़ार बार मारा।

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  11. चलिए आपके साथ हम भी मुस्कुरा देते हैं इस विडंवना पर ...
    सार्थक रचना ...!

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  12. आदरणीया वीना जी,मोनाली जी,मोनिका जी,मनोज जी,संजय जी,मीनल जी,वंदना जी,मृदुला जी,अनु जी,सदा जी,जाकिर जी,इंद्रानील जी,कुनाल जी,-आप सभी का तहे दिल से शुक्रिया.

    मोनाली जी-देखते रहने का तो मेरा भी दिल नहीं करता और यकीन मानिए मेरा ये सपना है की ऐसे उपेक्षित बच्चों के लिए कुछ न कुछ ज़रूर करूँगा.
    जैसा की वीना जी ने कहा की ऐसी एक नहीं कई फरीदा हैं जो शिक्षा से वंचित हैं.अभी मैं कुछ नहीं कर सकता लेकिन फिर भी ब्लॉग के माध्यम से मैं चाहता हूँ कि मुझे पढने वाले सुधि जन इस बारे में सोचें.शायद हम सब मिलकर कोई बेहतर कार्य योजना बना सकें.

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