प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

यदि आप चाहें तो हमें कुछ सहयोग कर सकते हैं

05 September 2011

वो स्कूल के दिन और मेरी टीचर्स

(स्कूल ड्रेस मे वह बच्चा जिसका ब्लॉग आप पढ़ रहे हैं )
ज शिक्षक दिवस है। पीछे लौटकर बीते दिनों को देखता हूँ, याद करता हूँ  तो मन होता है कि उन दिनों मे फिर से लौट जाऊँ। मैने पहले भी यहाँ एक बार ज़िक्र किया था कि पापा को देख कर मैंने थोड़ा बहुत लिखना सीखा है;स्कूलिंग शुरू हुई श्री एम एम शैरी स्कूल कमला नगर आगरा से जहां क्लास नर्सरी से हाईस्कूल तक( लगभग 5 वर्ष की आयु से 16 वर्ष की आयु तक ) पढ़ाई की। मुझे अभी भी चतुर्वेदी मैडम याद हैं जो 5th क्लास तक मेरी क्लास टीचर भी रहीं थीं और मेरे से विशेष स्नेह भी रखती थीं। वहाँ की वाइस प्रिन्सिपल श्रीवास्तव मैडम और जौहरी मैडम मैडम को भी मैं कभी नहीं भूल पाऊँगा। श्रीवास्तव मैडम और जौहरी मैडम के नाम मुझे अभी भी नहीं मालूम बस सरनेम याद है। श्रीवास्तव मैडम हिन्दी पढ़ाती थीं और जौहरी मैडम इंग्लिश बहुत अच्छा पढ़ाती  थी। मैं पढ़ाई मे शुरू मे ठीक था फिर बाद मे लुढ़कता चला गया लेकिन फिर भी चतुर्वेदी मैडम,श्रीवास्तव मैडम और जौहरी मैडम को मेरे से और मुझे उन से खासा लगाव था। जौहरी मैडम को ये पता चल गया था कि मैं लिखता हूँ बल्कि मैंने ही उनको अपनी कोई कविता कौपी के पन्ने पर लिख कर दिखाई थी तो उन्होने सलाह दी थी कि यशवन्त अपनी कविताओं को इस तरह पन्नों पर नहीं बल्कि किसी कौपी या डायरी मे एक जगह लिखा करो ऐसे खो सकते हैं (और अब तो यह ब्लॉग ही है सब कुछ सहेज कर रखने के लिये)। पूरी क्लास (लगभग 40-50 बच्चों के सामने)  मे उन्होने जो शब्द मेरे लिए कहे थे वो अब तक याद हैं "यह लड़का एक दिन कायस्थों का नाम रोशन करेगा " शायद  यह बात 6th या 7 th क्लास की होगी। पता नहीं कितना नाम रोशन करूंगा या नहीं पर उनका आशीर्वाद अब इतने सालों बाद भी मुझे याद है । इन्हीं जौहरी मैडम ने मुझे स्कूल ड्रेस की टाई बांधना सिखाई थी जो अब भी नहीं भूला हूँ और टाई बहुत अच्छी तरह से बांध लेता हूँ।
अक्सर सपनों मे मैं अब भी खुद को अपने स्कूल (एम एम शैरी स्कूल को मैं अपना स्कूल ही समझता हूँ) की किसी क्लास मे बैठा पाता हूँ जहां जौहरी मैडम ,श्रीवास्तव मैडम और चतुर्वेदी मैडम  पढ़ा रही होती हैं। लगभग 11 साल उस स्कूल को छोड़े हुए हो गए हैं और बहुत सी तमाम बातें मुझे अब भी याद हैं। बहुत सी शरारतें,क्लास्मेट्स से लड़ना ,स्कूल का मैदान और उस मे लगे कटीले तार जिन्हें दौड़ कर फाँदना बहुत अच्छा लगता था और अक्सर चोट भी खाई थी।   वर्ष 1988 मे पापा ने मेरा एडमिशन उस स्कूल मे इसलिए करवाया था क्योंकि वह घर से बहुत पास था। वह स्कूल अब भी वहीं है पर शायद सभी टीचर्स बदल गए हैं और बच्चे तो बदलेंगे ही जिनमे से एक मैं (अब 28 साल का बच्चा) उस शहर से बहुत दूर ,उस स्कूल से बहुत दूर उन टीचर्स से बहुत दूर हो चुका हूँ। लेकिन अपनी इन  सब से पसंदीदा टीचर्स को मैं कभी नहीं भूल पाऊँगा। 

33 comments:

  1. स्कूली जीवन से जुड़ी यादों का सुंदर संस्मरण......शुभकामनायें

    ReplyDelete
  2. जीवन में ऐसे ही कुछ लोग अपनी ऐसी छाप अंकित कर जाते हैं कि जीवन भर याद रहते हैं...अच्छा लगा पढ़कर.

    ReplyDelete
  3. शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ और सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन जी को नमन!

    ReplyDelete
  4. बहुत सुन्दर लेख बधाई बचपन में पहुँचाने के लिए
    आशा

    ReplyDelete
  5. happy teachers day !!!
    nice read..
    those memories are immortal :)

    ReplyDelete
  6. गुरुजनों को सादर प्रणाम ||

    सुन्दर प्रस्तुति पर
    हार्दिक बधाई ||

    ReplyDelete
  7. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति बचपन की गलियों में एक बार फिर हो आये ...शुभकामनाएं ।

    ReplyDelete
  8. सुन्दर यादें।
    शिक्षक दिवस की शुभकामनायें.

    ReplyDelete
  9. शिक्षक दिवस के अवसर पर सुन्दर संस्मरण!

    ReplyDelete
  10. यशवंत जी, हो सकता है आपकी कोई शिक्षिका भी यह ब्लॉग पढ़ रही हों, उन्हें बहुत गर्व महसूस हो रहा होगा..सुंदर व रोचक पोस्ट !

    ReplyDelete
  11. सुनहरी यादें...
    शिक्षक दिवस की शुभकामनायें....

    ReplyDelete
  12. Happy Teacher's dya Yashwant ji... n aap to bachpan se hi bahut disciplined rahe hain...
    n sure aapke teachers ko aap par naz hoga... n dekhiye aaj paki teacher ki baat sach ho gai...
    n thank you so much ek baar fir se school le jane ke liye... :)

    ReplyDelete
  13. सुन्दर संस्मरण ......शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ

    ReplyDelete
  14. अच्छे शिक्षक हमेशा याद रहते हैं!

    ReplyDelete
  15. बहुत ही रोचक संस्मरण, मुझे भी स्कूली दिन याद आ गए, सचमुच स्कूल और टीचर्स का हमारे व्यक्तित्व निर्माण में बड़ा योगदान होता है....ये लेख सबको अपने बचपन में ले जाता है....अद्भुत.....

    ReplyDelete
  16. शिक्षक दिवस की शुभकामनायें !
    स्कूल के शिक्षक हर किसी के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं ... पर मैं आपके लिए दुआ करूँगा कि आप केवल "कायस्थों" का नहीं बल्कि पूरे देश का नाम रोशन करें ...

    ReplyDelete
  17. बहुत ही रोचक संस्मरण, मुझे भी स्कूली दिन याद आ गए, सचमुच स्कूल और टीचर्स का हमारे व्यक्तित्व निर्माण में बड़ा योगदान होता है....ये लेख सबको अपने बचपन में ले जाता है....अद्भुत.....

    ReplyDelete
  18. मधुर यादें बचपन की ...अच्छा लगा पढ़कर..

    ReplyDelete
  19. पहली कक्षा की शिक्षिका--
    माँ के श्रम सा श्रम वो करती |
    अवगुण मेट गुणों को भरती |
    टीचर का एहसान बहुत है --
    उनसे यह जिंदगी संवरती ||


    माँ का बच्चा हरदम अच्छा,
    झूठा बच्चा फिर भी सच्चा |
    ठोक-पीट कर या समझाकर-
    बना दे टीचर सच्चा-बच्चा ||


    लगा बाँधने अपना कच्छा
    कक्षा दो में पहुंचा बच्चा |
    शैतानी में पारन्गत हो
    टीचर को दे जाता गच्चा ||

    ReplyDelete
  20. बहुत सुंदर यादें... बहुत सुंदर

    ReplyDelete
  21. shikshak diwas ka suawasar par bahut badiya sansmaran prastuti ..
    shikshak diwas kee aapko bhi bahut bahut haardik shubhkamnayen..

    ReplyDelete
  22. छात्र जीवन की यादें कोई नहीं भूलता न ही भूलनी चाहिए.सुन्दर संस्मरण.

    ReplyDelete
  23. स्कूल के दिन होते ही इतने खूबसूरत हैं ,जो भूलाए नहीं जासकते....
    शिक्षक दिवस की शुभकामनायें !

    गुरुर् ब्रह्मा गुरु विश्णु: गुरुर् देवो महेश्वर: I
    गुरुर् सक्षात् परब्रह्म: तस्मै श्री गुरवे नम: II..

    ReplyDelete
  24. बहुत अच्छा संस्मरण

    ReplyDelete
  25. अच्छी यादें...आपको भी शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनायें।

    ReplyDelete
  26. बहुत सुन्दर संस्मरण .... मुझे लगता है कि शायद ऐसे ही कोई विद्यार्थी मुझे भी याद करता होगा :):)

    ReplyDelete
  27. प्यारी आपकी स्कूल की यादें और क्यूट फोटो ....

    ReplyDelete
  28. संस्मरण अच्छा है आपका..........फुल्टू लल्लू लग रहो हो फोटो में :-)

    ReplyDelete
  29. बहुत सुन्दर संस्मरण यशवंत जी ! आपने आगरा में शिक्षा पाई है यह तथ्य और प्रीतिकर लगा ! बचपन के शिक्षक और मित्र सदैव मन पर अमिट छाप छोडते हैं ! खूबसूरत आलेख के लिये आभार !

    ReplyDelete
  30. आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद!

    ReplyDelete
  31. जीवन भर याद रहते हैं कुछ टीचर ... और याद आते हैं हमेशा ...

    ReplyDelete

Popular Posts

+Get Now!