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26 April 2014

वह भी कुछ तप कर मुस्काए ...



हँसिया-हथोड़ा चलाने वाला
गर ऐसा पत्थर हो जाए
संतुष्टि के फूलों जैसा
वह भी कुछ तप कर मुस्काए ...

वह दृश्य होगा सुकून भरा
जब पसीने के पानी से 
सिंच कर ….
रंग-बिरंगा उपवन होगा
हर पत्थर के सीने पर।

~यशवन्त यश©

10 comments:

  1. Pathar par pasine se sinchit upvan...kya vichaar hai ! Bahut badhiya yashwant ji :-)

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  2. -सुंदर रचना...
    आपने लिखा....
    मैंने भी पढ़ा...
    हमारा प्रयास हैं कि इसे सभी पढ़ें...
    इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना...
    दिनांक 28/04/ 2014 की
    नयी पुरानी हलचल [हिंदी ब्लौग का एकमंच] पर कुछ पंखतियों के साथ लिंक की जा रही है...
    आप भी आना...औरों को बतलाना...हलचल में और भी बहुत कुछ है...
    हलचल में सभी का स्वागत है...

    ReplyDelete
  3. आमीन ... काश ये कल्पना साकार हो सके ...
    बहुत खूब ..

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  4. आमीन...कोमल भाव !

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  5. काश कि वो दिन भी आए … अति उत्तम विचार। शुभकामनाएं

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  6. waah, bahut hi achhi rachna

    shubhkamnayen

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