प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

यदि आप चाहें तो हमें कुछ सहयोग कर सकते हैं

25 October 2018

शमा के बुझने तक........

ढलती जाती
गहराई हुई रात के 
सन्नाटे में 
मद्धम संगीत के 
लहराते सुर 
एकांत सफर के
साक्षी बन कर 
जैसे भर देते हैं प्राण 
साथ छोड़ चुके 
किसी साए में। 

पौ के फटने तक 
अनगिनत 
ख्वाबों के दरिया में 
डूब कर-उतर कर 
पलकें खुलते ही 
मिल जाती है 
मुक्ति 
हो जाती है 
विरक्ति 
नयी निशा के मिलने तक 
और 
शमा के बुझने तक। 

-यश ©
25/10/2018

2 comments:

मॉडरेशन का विकल्प सक्षम होने के कारण आपकी टिप्पणी यहाँ प्रदर्शित होने में थोड़ा समय लग सकता है।

कृपया किसी प्रकार का विज्ञापन टिप्पणी में न दें।

केवल चर्चामंच का लिंक ही दिया जा सकता है, इसके अलावा यदि बहुत आवश्यक न हो तो अपने या अन्य किसी ब्लॉग का लिंक टिप्पणी में न दें, अन्यथा आपकी टिप्पणी यहाँ प्रदर्शित नहीं की जाएगी।

Popular Posts

+Get Now!