नयी उम्मीदों के साथ
नयी बातों के साथ
नए ख्यालों के साथ
ख्वाब सबके पूरे हों ।
जो बरसों से अधूरे रहे
अनकहे-अनसुने रहे
चाहे जितने प्रकार हों
शब्द सब साकार हों।
नया सूरज कुछ कहता रहे
हर दिन कुछ बनता रहे
रात का अंधेरा छँटता रहे
प्रेम भाव बँटता रहे।
नववर्ष!
आशा का प्रतीक हो
उल्लास से व्यतीत हो
तिनका-तिनका खुशियों से
घर-आँगन रोशन हो।
~यशवन्त माथुर©