हिस्सा है
जीवन का
प्रकृति का
कल्पना का
सोच का
नक्शों पर
उकेरी हुई
सीमाओं का
जल, नभ
और थल का।
तनाव
हिंसा है
अहिंसा है
सत्य है
मिथ्या है।
तनाव
अखंडित है
तो खंडित भी है
पूजनीय
और पतित भी है।
इसलिए
तनाव की
अतिश्योक्तिपूर्ण
स्वाभाविकता के
परमाणु से भी
किसी सूक्ष्म कण में
मैं ढूंढ रहा हूं
एक हिस्सा
शांति की
पुकार का।
~यशवन्त माथुर©
16042026
सुंदर
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