नियति की
हर क्रिया में
कर्म की प्रतिक्रिया सा
निर्बाध निर्विरोध
लेता हूं अवश्य ही
प्रतिशोध
किसी दर्पण पर
बनते तीखे प्रतिबिम्ब
और परावर्तन
के साथ
चाह कर भी
कोई बच नहीं सकता
मेरी थपकी
और वार से
क्योंकि मैं
कोई चमत्कार नहीं
सिर्फ
तुम्हारा समय हूं।
-यशवन्त माथुर©
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