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02 October 2013

यह वो कल नहीं


यह वो कल नहीं
कभी जिसके बारे में 
तुमने सोचा था 

यह वो कल नहीं 
कभी जिसके कारण 
तुमने सब कुछ छोड़ा था 

यह वो कल नहीं 
कभी जिसके सुनहरे स्वप्न 
तुम्हें हर रोज़ आते थे 

यह वो कल नहीं 
कभी जिसके लिये 
तुम राम धुन को गाते थे 

नहीं! नहीं!! नहीं!!!
यह वो कल नहीं; स्वार्थी आज है 
जिसके बटुए में बंद 
तुम्हारा मूलधन और ब्याज है

यह वो कल नहीं 
करती जिसको रोशन राजघाट है 
तीनों बुराई* मे रचा बसा 
यह उल्टा पुल्टा आज है।
 
~यशवन्त यश©

*तीनों बुराई-बुरा मन देखो 
                  बुरा मत सुनो 
                  बुरा मत बोलो  

10 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बुधवार (02-10-2013) नमो नमो का मन्त्र, जपें क्यूंकि बरबंडे - -चर्चा मंच 1386 में "मयंक का कोना" पर भी है!
    महात्मा गांधी और पं. लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धापूर्वक नमन।
    दो अक्टूबर की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति !
    नवीनतम पोस्ट मिट्टी का खिलौना !
    नई पोस्ट साधू या शैतान

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  3. बिल्कुल सच कहा आपने

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  4. बहुत प्रभावी रचना ... सच में आज कैसा है ...

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  5. सुन्दर अभिव्यक्ति यशवंत भाई। गांधीजी के सपनों को पूरा करने में हम अपना बूँद-बूँद भी योगदान दें, तो उनके सपनों का सागर भर जाएगा - शायद यही प्रतिबद्धता चाहिए। आशान्वित हूँ।
    सादर
    मधुरेश

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  6. सच्चा लिखा है. उनकी आत्मा को वेदना जरूर हो रही होगी आज का हाल देखकर.

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  7. सही बात आज में कल जैसी बात कहाँ...
    बापू को नमन...

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