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29 October 2013

बैठा है एक दीये वाला

सड़क किनारे 
ठौर जमाए 
बैठा है एक दीये वाला 
 
भूख की आग में 
तपी मिट्टी से 
हर घर रोशन करने वाला 

उसके आगे ढेर सजे हैं 
तरह तरह के आकार ढले हैं 
वो है खुशियाँ देने वाला 

मोल भाव में वो ही फँसता 
वो ही महंगा वो ही सस्ता
फिर भी मुस्कान की चादर ओढ़े 

बैठा  है एक दीये वाला।

~यशवन्त यश©

10 comments:

  1. बहुत सुन्दर, मुझे भी बहुत अच्छे लगते हैं...ये दिये वाले.

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  2. बहुत सुंदर और सटीक...

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  3. बहुत खुबसूरत ...दियेवाला .....

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  4. ह्रदय छू लिया आपकी पंक्तियों ने.

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  5. बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ,
    आज के परिदृश्य में देखे तो हर आम आदमी एक दिए वाले कि तरह ही है,

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  6. बहुत सुन्दर संवेदनशील अभिव्यक्ति...

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  7. बहुत खूब
    पूरी दीवाली का दृश्य सामने आ गया

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  8. सार्थक अभिव्यक्ति
    हार्दिक शुभकामनायें

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