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13 August 2015

यूं ही चलते चलते

यूं ही चलते चलते
कभी कदम
थम जाते हैं
थोड़ा सुस्ताते हैं
और फिर
चलने लग जाते हैं
उसी पूरी रफ्तार से
कई सुबहों
और
कई शामों की
परिक्रमा लगाते लगाते
फिर एक दिन
जब सोते हैं
तब जागते हैं
किसी नये चोले के भीतर
किसी और
अलग सी दुनिया में
यूं ही चलते चलते।

~यशवन्त यश©

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