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08 August 2015

कुछ लोग -26

वर्णांधता से ग्रस्त
कुछ पढे लिखे
स्थापित लोग
नहीं कर पाते अंतर
व्यंग्य,कविता,
कहानी और लेख में
निकालते हैं मीन मेख
सत्यता को 
बिना देखे
बिना परखे
नाचते हैं 
दूसरों की
कठपुतली
बन कर
और अंततः
अपने भीतर की
ईर्ष्या की
आग में झुलस कर
खुद ही हो जाते हैं भस्म
ऐसे ही कुछ लोग।

~यशवन्त यश©

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