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15 August 2015

कुछ लोग-27

(1)

कुछ लोग
समझते हैं
आज़ादी का
सही मतलब
और आनंद लेते हैं
हर पल का
कभी
कूड़े के ऊंचे ढेरों में
तलाशते हैं
दो वक़्त की रोटी
और अपना भविष्य
कभी फुटपाथों पर
फटेहाल भी
मुस्कुराते हुए
निभाते हैं
खुले आसमान
और ज़मीन से
अपना रिश्ता ।

(2)

कुछ लोग
समझते हैं
आज़ादी को
अपने घर की खेती
जिनका उद्देश्य
कायरों की तरह
छुप कर
करना होता है वार
दूसरों पर
कभी ज़ुबानों से
कभी तीरों से
हर चूकते निशाने को
समझते हैं
अपनी वीरता का दम
हर उल्टे वार से बेखबर
आज़ादी के भ्रम में
धँसते जाते हैं
दलदलों में
कुछ लोग
बहुत समझदारी से
दिखाते हैं खुद को
नासमझ
आज़ादी से।

~यशवन्त यश©

3 comments:

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  1. बहुत सुन्दर और सटीक अभिव्यक्ति...स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!

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  2. बहुत सुंदर

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