हाँ
यह सुनिश्चित है
कि अंततः
अगर कुछ बचा
तो वह अवशेष ही होगा
अधूरी
या पूरी हो चुकी
बातों का
उनसे जुड़े
दिनों का
या रातों का।
हाँ
अनिश्चित जीवन के
किसी एक कालखंड में
सबको रह ही जाना है
अपूर्ण
बन ही जाना है
अवशेष
क्योंकि अवशेष ही
होते हैं साक्ष्य
एक रची-बसी सभ्यता
और
जीवन के अस्तित्व के।
21062025
एक निवेदन-
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सुंदर रचना
ReplyDeleteआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 25 जून 2025को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
ReplyDeleteसुंदर
ReplyDeleteसुंदर सृजन, सृष्टि में कुछ भी पूर्ण नहीं है सिवाय उस आधार के जिस पर वह टिकी है
ReplyDeleteसुन्दर
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