कुछ ऐसा करें
कि मुरझाए चेहरे मुस्कुराएं
आओ आज एक दीप जलाएं।
एक दीप
जो समरसता का हो
सबकी साझी सभ्यता का हो।
जगमगाएं जिससे
दसों दिशाएं
आओ आज एक दीप जलाएं।
एक दीप
जो भरे उजास
हर गरीब की देहरी पर।
और जिसकी लौ से
अमृत बने
मिट्टी के कच्चे चूल्हे पर।
जिसकी तपिश
तमस मिटाकर
सबके सारे भरम हटाए
आओ आज एक दीप जलाएं।
यशवन्त माथुर
शुभकामनाएं दीप पर्व की
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ReplyDeleteआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 22 अक्टूबर 2025 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
बहुत सुंदर
ReplyDeleteदीपावली पर सबके लिए मंगल कामना से भरी सुंदर रचना!!
ReplyDeleteबहुत सुंदर, दीवाली की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई
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