आ गई है
एक जुलाई की
बादल भरी
उमस से भरपूर सुबह।
छोटे बच्चे
अपनी मस्तियों को
लगा चुके हैं तह
और रख चुके हैं
बीते जून की
आखिरी शाम
ग्रीष्म अवकाश के
बड़े से बक्से में
फिर एक वर्ष के लिए।
अब उन बच्चों की
पीठ पर सजेंगे
रंग-बिरंगे
नए-पुराने
हल्के-भारी बस्ते!
और उनकी ऊर्जा से
चिड़ियों की तरह
चहकेंगे
हर गली
चौराहे
और रस्ते।
ये छोटे छोटे
खिलखिलाते बच्चे
जिद्द मनवाने को
रुआंसे बच्चे
कंधे पर बोतल
गले में परिचय पत्र
और पीठ पर
साजो-सामान लादे बच्चे
कम नहीं लगते
युद्ध फतह करने जाते
सैनिकों की
किसी टोली से।
अंतर
सिर्फ इतना सा होता है
कि सैनिक
हो चुके होते हैं
मातृभूमि को समर्पित
और बच्चे
बढ़ा रहे होते हैं
अपने नन्हे कदम
भविष्य को
समर्पित होने के लिए।
✓यशवन्त माथुर©
01072026
ReplyDeleteआपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 8 जुलाई 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
सुंदर रचना
ReplyDelete