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04 January 2021

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01 January 2021

जीवन को चलना ही है


Image Copyright-Yashwant Mathur



















अंधेरा कितना भी हो 
उजियारा होना ही है 
सुई रुक भी जाए 
घड़ी को बदलना ही है। 

कहीं ढलती शाम होगी 
इस समय 
कहीं सूरज को किसी ओट से 
उगना ही है। 

यहाँ सर्द हवा है, धुंध है  
लेकिन 
छँटेंगे बादल फिर धूप को 
निकलना ही है। 

यह दौर काँटों का है 
माना, फिर भी 
फूलों  की हर कली को 
रोज़ खिलना ही है। 

टूटते-टूटते भी बाकी है 
एक उम्मीद इतनी सी- 
कोहरा कितना भी हो 
जीवन को चलना ही है।  

(नववर्ष  2021 सबके लिये शुभ और मंगलमय हो )

-यशवन्त माथुर ©
01012021 

30 December 2020

मैं नहीं कवि.....

मैं नहीं कवि 
न ही कविता को ही कह पाता हूँ 
बस जो भी मन में आता है 
वो ही लिखता जाता हूँ। 

है नहीं भान न ही ज्ञान 
रस छंद अलंकारों का
परिचय बस थोड़ा ही है 
काव्य के प्रकारों का। 

बस थोड़ा जो कुछ सहेजा समेटा 
और जो कुछ है देखा समझा
शब्दों की डोर में वो ही
थोड़ा पिरोता जाता हूँ । 

मैं नहीं कवि 
न ही कविता को ही कह पाता हूँ 
मन की कोर से जो निकलती
वो बात बताता जाता हूँ ।

-यशवन्त माथुर ©
23122020

24 December 2020

कि मौत आने को है....

हर ग़म जाने को है कि मौत आने को है,
चुटकी भर खुशियाँ धूल में मिल जाने को हैं।

बेइंतिहा शिकायतों के वजूद पर मेरा सबर,
पछता रहा कि जो बीता वो कल आने को है।

धोखा इस बात का था कि उम्मीदें साहिल पर थीं, 
मैं  घिसटता ही रहा  कि साँसें टूट जाने को हैं।  

ठहर जा रे वक़्त! और बीत कर क्या होगा?
जो तू करने को था कर ही जाने को है। 

-यशवन्त माथुर ©
24122020 

22 December 2020

Shravasti Trip Photographs (30/11/2019) Part VI



























(IMAGES COPYRIGHT YASHWANT MATHUR©)

20 December 2020

कुछ लोग-53

अपने स्वार्थ में 
पर्दे के पीछे रह कर 
दूसरों के काम बिगाड़कर 
संतुष्ट हो जाने वाले... 
और प्रत्यक्ष होकर 
हितैषी जैसा दिखने वाले 
दोस्त के नकाब में 
दुश्मनी निभाने वाले 
कुछ लोग
आस पास रह कर 
जिसे समझते हैं 
भेद 
वह सिर्फ सुई होता है 
जो अपनी चुभन से
एक दिन  
बिखेर कर रख देता है 
उनका सारा सच 
और फिर 
कुछ नहीं बचता 
हर तरफ फैली हुई 
कालिख के सिवा। 

-यशवन्त माथुर ©
20122020

[कुछ लोग शृंखला की अन्य पोस्ट्स यहाँ क्लिक कर के देख सकते हैं]

16 December 2020

Shravasti Trip Photographs (30/11/2019) Part V














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