प्रतिलिप्याधिकार/सर्वाधिकार सुरक्षित ©

इस ब्लॉग पर प्रकाशित अभिव्यक्ति (संदर्भित-संकलित गीत /चित्र /आलेख अथवा निबंध को छोड़ कर) पूर्णत: मौलिक एवं सर्वाधिकार सुरक्षित है।
यदि कहीं प्रकाशित करना चाहें तो yashwant009@gmail.com द्वारा पूर्वानुमति/सहमति अवश्य प्राप्त कर लें।

यदि आप चाहें तो हमें कुछ सहयोग कर सकते हैं

02 June 2010

मौत का जशन

शवों को गंगा जल से नहलाते हैं ,
और चिताओं पर देसी घी बरसते हैं लोग
मौत के लंगर को भी स्वाद ले ले कर खाते हैं लोग,
ये न सोचा की जीते जी 'उसे' क्या मिला क्या नहीं,
मैं पूछता हूँ पर वो बताना नहीं चाहते ,
ये मौत का जश्न है या ऐसे ही शोक मानते हैं लोग.

No comments:

Post a Comment

Popular Posts

+Get Now!