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08 June 2010

एक चमकता हुआ सितारा

एक चमकता हुआ सितारा

अपनी चमक को खो रहा है.....

याद करके अपनी जवानी

बुढ़ापे में रो रहा है

एक चमकता हुआ सितारा

अपनी चमक को खो रहा है.......

भूले बिसरे पल वो सुनहरे

बरबस याद आते हैं

सपना बन कर के मन में कुछ ऐसे समां जाते हैं

बीती आयु समय जीवन का अब पूरा हो रहा है

एक चमकता हुआ सितारा हुआ सितारा

अपनी चमक को खो रहा है.....

याद आती अपनी जवानी

बचपन याद आता है

कितने सुनहरे थे वो दिन

अंतिम समय अब आ रहा है

एक चमकता हुआ सितारा

अपनी चमक को खो रहा है.....

खुशहाल चमन था

ठंडी हवाएँ रोज़ गुलशन में चलती थीं

बागों में खिलती थीं कलियाँ

खुशबु गुलाबों की उडती थी

हरियाली गयी

अब पतझड़ आ रहा है

एक चमकता हुआ सितारा

अपनी चमक को खो रहा है....

बीते दिन बीते पल

आते रहेंगे याद युहीं

यादों को सहेजे रखने का चलन

सदियों से चला आ रहा है

एक चमकता हुआ सितारा

अपनी चमक को खो रहा है.....

4 comments:

  1. भूले बिसरे पल वो सुनहरे

    बरबस याद आते हैं.....सुन्दर!!

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  2. अभी तो बहार आने के दिन हैं ... पतझड़ भला क्यों ? सितारे की चमक और बढे यही शुभकामनायें हैं ..

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  3. बीते दिन बीते पल

    आते रहेंगे याद युहीं.....बीते दिन भूलाए नही भूलते....शुभकामनायें

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